• Home
  • Politics
  • Buy Now
Dainik Mitan
  • Home
  • Politics
  • Buy Now
  • Home
  • Politics
  • Buy Now
  • Home
  • Politics
  • Buy Now
Close Menu
Dainik MitanDainik Mitan
  • Home
  • Politics
  • Buy Now

Subscribe to Updates

Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

What's Hot

डिप्टी सीएम साव और सांप्रदायिक राजनीति की बहस: भारतीय लोकतंत्र के समक्ष चुनौतियाँ और समाधान

January 12, 2026

छत्तीसगढ़ महिला कांग्रेस अध्यक्ष पद: नेतृत्व परिवर्तन की सुगबुगाहट और राज्य की महिला राजनीति का भविष्य

January 5, 2026

भूपेश बघेल और छत्तीसगढ़ की राजनीतिक बयानबाजी: आरोपों के बीच नेतृत्व की अग्निपरीक्षा

January 4, 2026
Facebook X (Twitter) Instagram
Dainik MitanDainik Mitan
Home»Blog»डिप्टी सीएम साव और सांप्रदायिक राजनीति की बहस: भारतीय लोकतंत्र के समक्ष चुनौतियाँ और समाधान
Blog

डिप्टी सीएम साव और सांप्रदायिक राजनीति की बहस: भारतीय लोकतंत्र के समक्ष चुनौतियाँ और समाधान

By January 12, 2026No Comments0 Views
Facebook Twitter Pinterest LinkedIn WhatsApp Reddit Tumblr Email
Share
Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

Table of Contents

Toggle
  • डिप्टी सीएम साव और सांप्रदायिक राजनीति की बहस: भारतीय लोकतंत्र के समक्ष चुनौतियाँ और समाधान
    • डिप्टी सीएम साव का बयान: एक राजनीतिक विश्लेषण
    • भारतीय राजनीति में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का इतिहास और वर्तमान
      • धार्मिक पहचान का दुरुपयोग
      • वोट बैंक की राजनीति
      • सामाजिक ताने-बाने पर प्रभाव
    • विभाजनकारी राजनीति के सामाजिक और आर्थिक परिणाम
      • सामाजिक सद्भाव का क्षरण
      • विकास में बाधा
      • राष्ट्रीय एकता पर खतरा
    • नेतृत्व की भूमिका: डिप्टी सीएम साव जैसे नेताओं की जिम्मेदारी
      • सकारात्मक संवाद का प्रोत्साहन
      • विकासोन्मुखी एजेंडा
      • उदाहरण प्रस्तुत करना
    • चुनाव रणनीति और आरोप-प्रत्यारोप का चक्र
      • चुनावी लाभ की गणना
      • आरोप-प्रत्यारोप का चक्र
      • जनता की भूमिका
    • मीडिया और नागरिक समाज की भूमिका
      • निष्पक्ष रिपोर्टिंग
      • जागरूकता फैलाना
    • समाधान की ओर: समावेशी और विकासोन्मुखी राजनीति
      • साझा मूल्यों पर जोर
      • समग्र विकास का दृष्टिकोण
      • अंतर-सामुदायिक संवाद
    • निष्कर्ष
    • FAQ
      • सांप्रदायिक राजनीति क्या है?
      • नेता ऐसे बयान क्यों देते हैं?
      • डिप्टी सीएम साव जैसे नेताओं की समाज में क्या भूमिका है?
      • सांप्रदायिक राजनीति के क्या नकारात्मक परिणाम हो सकते हैं?

डिप्टी सीएम साव और सांप्रदायिक राजनीति की बहस: भारतीय लोकतंत्र के समक्ष चुनौतियाँ और समाधान

Meta Description: डिप्टी सीएम साव के हालिया बयान ने सांप्रदायिक राजनीति पर नई बहस छेड़ी है। जानें भारतीय लोकतंत्र में विभाजनकारी राजनीति की चुनौतियाँ, नेताओं की भूमिका और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के उपाय। यह लेख मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के गहरे प्रभावों और समावेशी विकास की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है।

भारतीय राजनीति में बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर अक्सर चलता रहता है, खासकर जब देश में महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम या चुनाव का माहौल हो। हाल ही में, एक ऐसे ही बयान ने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है, जिसमें डिप्टी सीएम साव ने एक प्रमुख राजनीतिक दल के नेता पर सांप्रदायिक राजनीति करने का आरोप लगाया है। यह बयान केवल एक राजनीतिक टिप्पणी नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र के सामने मौजूद एक गंभीर चुनौती – सांप्रदायिक राजनीति – पर एक महत्वपूर्ण बहस को जन्म देता है। यह लेख डिप्टी सीएम साव के बयान के संदर्भ में सांप्रदायिक राजनीति के विभिन्न पहलुओं, इसके परिणामों और भारतीय समाज पर इसके प्रभावों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करता है।

डिप्टी सीएम साव का बयान: एक राजनीतिक विश्लेषण

हाल ही में, डिप्टी सीएम साव ने सार्वजनिक रूप से एक बयान जारी किया, जिसमें उन्होंने एक अन्य राजनीतिक दल के मुखिया पर तीखा प्रहार करते हुए उन पर सांप्रदायिक आधार पर राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि इस तरह की राजनीति देश की एकता और अखंडता के लिए खतरा है और समाज में विभाजन पैदा करती है। डिप्टी सीएम साव का यह बयान उस व्यापक राजनीतिक संवाद का हिस्सा है, जहां नेता अक्सर अपने विरोधियों की नीतियों और बयानों को राष्ट्रीय हित के खिलाफ बताते हैं। इस प्रकार के आरोप-प्रत्यारोप भारतीय राजनीति में आम हैं, लेकिन वे अक्सर समाज में बड़े मुद्दों पर चिंतन को बढ़ावा देते हैं।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश विभिन्न सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। डिप्टी सीएम साव का यह आरोप दर्शाता है कि उनकी पार्टी और सरकार सांप्रदायिक सद्भाव और विकास पर केंद्रित राजनीति को प्राथमिकता देती है, जबकि वे विभाजनकारी एजेंडे का विरोध करते हैं। उनके इस बयान से राजनीतिक गलियारों में गरमाहट बढ़ी है और इसने सांप्रदायिक राजनीति की प्रकृति पर एक बार फिर चर्चा छेड़ दी है।

भारतीय राजनीति में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का इतिहास और वर्तमान

सांप्रदायिक राजनीति का भारतीय इतिहास से गहरा नाता रहा है। आजादी से पहले और बाद में भी, विभिन्न राजनीतिक शक्तियों ने धार्मिक पहचान का उपयोग अपने राजनीतिक उद्देश्यों को साधने के लिए किया है। सांप्रदायिक राजनीति मूल रूप से एक विशेष धर्म या धार्मिक समूह के हितों को राष्ट्रीय हितों से ऊपर रखने और दूसरे धार्मिक समूहों के प्रति संदेह या शत्रुता का भाव पैदा करने पर आधारित होती है।

  • धार्मिक पहचान का दुरुपयोग

    सांप्रदायिक राजनीति में धार्मिक प्रतीकों, भावनाओं और ऐतिहासिक घटनाओं का अक्सर विकृत रूप से इस्तेमाल किया जाता है, ताकि एक विशेष समुदाय को गोलबंद किया जा सके। इससे समुदायों के बीच अविश्वास और विभाजन पैदा होता है, जो अंततः सामाजिक सद्भाव को भंग करता है।

  • वोट बैंक की राजनीति

    अनेक बार, सांप्रदायिक बयानबाजी का उद्देश्य विशिष्ट समुदायों के वोटों को अपनी ओर आकर्षित करना होता है। नेता अपने बयानों के माध्यम से एक समुदाय को दूसरे के खिलाफ खड़ा करने की कोशिश करते हैं, जिससे तात्कालिक चुनावी लाभ मिल सके।

  • सामाजिक ताने-बाने पर प्रभाव

    यह राजनीति केवल चुनावी मैदान तक सीमित नहीं रहती, बल्कि समाज के ताने-बाने को भी नुकसान पहुंचाती है। यह लोगों के बीच संवाद को कम करती है और धार्मिक आधार पर खाई को गहरा करती है।

आज भी, विभिन्न राजनीतिक दल प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस प्रकार की राजनीति में संलग्न होते दिखते हैं। डिप्टी सीएम साव का बयान इसी मौजूदा परिदृश्य की ओर इशारा करता है, जहाँ सांप्रदायिक विभाजन को बढ़ावा देने की कोशिशें अभी भी जारी हैं।

विभाजनकारी राजनीति के सामाजिक और आर्थिक परिणाम

सांप्रदायिक राजनीति के परिणाम केवल राजनीतिक नहीं होते, बल्कि वे समाज और अर्थव्यवस्था पर भी गहरा प्रभाव डालते हैं। जब समाज धार्मिक आधार पर विभाजित होता है, तो इसके गंभीर और दूरगामी परिणाम सामने आते हैं:

  • सामाजिक सद्भाव का क्षरण

    सबसे पहले, यह सामाजिक सद्भाव को कमजोर करता है। विभिन्न समुदायों के लोग एक-दूसरे से दूर होते जाते हैं, संदेह और अविश्वास बढ़ता है। यह स्थिति सामाजिक संघर्षों और हिंसा का मार्ग प्रशस्त कर सकती है, जैसा कि भारत ने अतीत में कई बार देखा है।

  • विकास में बाधा

    जब समाज विभाजित होता है, तो सरकार और नागरिकों का ध्यान वास्तविक विकास के मुद्दों से हटकर आंतरिक कलह और पहचान की राजनीति पर केंद्रित हो जाता है। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे और आर्थिक विकास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में प्रगति बाधित होती है। निवेश पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और रोजगार के अवसर कम होते हैं, क्योंकि निवेशक अस्थिर वातावरण में निवेश करने से कतराते हैं।

  • राष्ट्रीय एकता पर खतरा

    सांप्रदायिक राजनीति राष्ट्रीय एकता के लिए एक गंभीर खतरा है। भारत जैसे बहुधर्मी, बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक देश में एकता बनाए रखने के लिए सभी समुदायों को साथ लेकर चलना अनिवार्य है। विभाजनकारी राजनीति इस मूलभूत सिद्धांत के खिलाफ जाती है और देश को कमजोर करती है।

डिप्टी सीएम साव और उनके जैसे अन्य जिम्मेदार नेता इन नकारात्मक परिणामों को समझते हैं और इसीलिए वे सांप्रदायिक राजनीति के खिलाफ अपनी आवाज उठाते रहते हैं।

नेतृत्व की भूमिका: डिप्टी सीएम साव जैसे नेताओं की जिम्मेदारी

किसी भी देश की दिशा और दशा तय करने में उसके नेताओं की भूमिका सर्वोपरि होती है। डिप्टी सीएम साव जैसे पद पर आसीन नेताओं पर समाज को एक सही दिशा देने की बड़ी जिम्मेदारी होती है।

  • सकारात्मक संवाद का प्रोत्साहन

    जिम्मेदार नेताओं को सकारात्मक और समावेशी संवाद को बढ़ावा देना चाहिए। उनके शब्दों में एकता, सौहार्द और सहिष्णुता का संदेश होना चाहिए, न कि विभाजन या घृणा का।

  • विकासोन्मुखी एजेंडा

    नेताओं को लोगों का ध्यान पहचान की राजनीति से हटाकर शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और गरीबी उन्मूलन जैसे वास्तविक मुद्दों पर केंद्रित करना चाहिए। यह तभी संभव है जब वे स्वयं विकासोन्मुखी एजेंडा अपनाएं।

  • उदाहरण प्रस्तुत करना

    नेता अपने व्यवहार और बयानों से समाज के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। यदि डिप्टी सीएम साव जैसे नेता सांप्रदायिक राजनीति की निंदा करते हैं और समावेशी मूल्यों का समर्थन करते हैं, तो इससे समाज में एक सकारात्मक संदेश जाता है।

नेताओं की जिम्मेदारी है कि वे समाज के सभी वर्गों के हितों का प्रतिनिधित्व करें और यह सुनिश्चित करें कि किसी भी समुदाय को हाशिए पर न धकेला जाए।

चुनाव रणनीति और आरोप-प्रत्यारोप का चक्र

अक्सर, सांप्रदायिक राजनीति के आरोप चुनाव से पहले या उसके दौरान जोर पकड़ते हैं। राजनीतिक दल अपनी चुनावी संभावनाओं को बढ़ाने के लिए विभिन्न रणनीतियाँ अपनाते हैं, और इनमें से कुछ रणनीतियाँ विवादों को जन्म देती हैं।

  • चुनावी लाभ की गणना

    कई बार, नेता जानबूझकर ऐसे बयान देते हैं जो एक विशेष समुदाय को खुश कर सकें या दूसरे समुदाय को डरा सकें, ताकि चुनावी लाभ मिल सके। डिप्टी सीएम साव का आरोप इसी चुनावी गणित की ओर इशारा करता है, जहाँ कुछ नेता ध्रुवीकरण की रणनीति अपनाते हैं।

  • आरोप-प्रत्यारोप का चक्र

    जब एक दल दूसरे पर सांप्रदायिकता का आरोप लगाता है, तो दूसरा दल भी पलटवार करता है। यह आरोप-प्रत्यारोप का चक्र चलता रहता है, जिससे वास्तविक मुद्दों पर बहस गौण हो जाती है और जनता भ्रमित होती है।

  • जनता की भूमिका

    ऐसे समय में, जनता और मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्हें नेताओं के बयानों का निष्पक्ष विश्लेषण करना चाहिए और यह समझना चाहिए कि क्या ये बयान वास्तविक चिंताओं पर आधारित हैं या केवल चुनावी पैंतरेबाजी हैं।

डिप्टी सीएम साव जैसे नेताओं द्वारा ऐसी राजनीति की आलोचना इस बात पर जोर देती है कि राजनीतिक प्रतिस्पर्धा सिद्धांतों और विकास के मुद्दों पर आधारित होनी चाहिए, न कि विभाजन पर।

मीडिया और नागरिक समाज की भूमिका

सांप्रदायिक राजनीति के दौर में मीडिया और नागरिक समाज की भूमिका अत्यधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। वे जनता तक सही जानकारी पहुंचाने, विभिन्न दृष्टिकोणों को सामने रखने और सांप्रदायिक सद्भाव को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

  • निष्पक्ष रिपोर्टिंग

    मीडिया को नेताओं के बयानों की निष्पक्ष और संतुलित रिपोर्टिंग करनी चाहिए। उन्हें भड़काऊ बयानों को अनावश्यक रूप से बढ़ावा देने से बचना चाहिए और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को रोकने के लिए अपनी जिम्मेदारी को समझना चाहिए। तथ्यों की जांच (Fact-checking) और गलत सूचनाओं को उजागर करना मीडिया का एक महत्वपूर्ण कर्तव्य है।

  • जागरूकता फैलाना

    नागरिक समाज संगठन (सीएसओ) सांप्रदायिक सद्भाव के लिए काम कर सकते हैं, विभिन्न समुदायों के बीच संवाद को बढ़ावा दे सकते हैं और लोगों को सांप्रदायिक राजनीति के खतरों के प्रति जागरूक कर सकते हैं। वे शिक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के माध्यम से पूर्वाग्रहों को तोड़ने में मदद कर सकते हैं।

डिप्टी सीएम साव के बयान जैसे राजनीतिक संवादों को मीडिया और नागरिक समाज को एक अवसर के रूप में लेना चाहिए ताकि सांप्रदायिक राजनीति के मुद्दे पर व्यापक और रचनात्मक बहस छेड़ी जा सके।

समाधान की ओर: समावेशी और विकासोन्मुखी राजनीति

सांप्रदायिक राजनीति की चुनौती का सामना करने के लिए समावेशी और विकासोन्मुखी राजनीति को अपनाना ही एकमात्र स्थायी समाधान है। यह एक ऐसी राजनीति है जो सभी नागरिकों को समान मानती है, उनके अधिकारों का सम्मान करती है और उनके कल्याण के लिए काम करती है, चाहे उनकी धार्मिक या जातीय पृष्ठभूमि कुछ भी हो।

  • साझा मूल्यों पर जोर

    नेताओं को उन साझा मूल्यों और पहचानों पर जोर देना चाहिए जो हमें एक राष्ट्र के रूप में बांधते हैं, न कि उन भेदों पर जो हमें विभाजित करते हैं। भारतीय संविधान में निहित धर्मनिरपेक्षता, न्याय और समानता के सिद्धांत इस दिशा में मार्गदर्शक हो सकते हैं।

  • समग्र विकास का दृष्टिकोण

    सरकारों को सभी समुदायों के समग्र विकास पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी ढांचे में निवेश से सभी को लाभ होता है और यह सांप्रदायिक विभाजनों को पाटने में मदद करता है। डिप्टी सीएम साव जैसे नेता जो विकास की बात करते हैं, वे इसी दृष्टिकोण का समर्थन करते हैं।

  • अंतर-सामुदायिक संवाद

    विभिन्न समुदायों के बीच नियमित संवाद और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करना चाहिए। यह गलतफहमी को दूर करता है और आपसी समझ को बढ़ाता है।

भारत की विविधता उसकी ताकत है, और समावेशी राजनीति इस ताकत को बनाए रखने और आगे बढ़ाने का सबसे अच्छा तरीका है। डिप्टी सीएम साव के बयान को इस दिशा में एक कदम के रूप में देखा जा सकता है, जो विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ एक मजबूत संदेश देता है।

निष्कर्ष

डिप्टी सीएम साव का सांप्रदायिक राजनीति पर दिया गया बयान भारतीय लोकतंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी है। यह हमें याद दिलाता है कि भले ही भारत ने धर्मनिरपेक्षता को अपने मूल सिद्धांतों में से एक के रूप में अपनाया हो, फिर भी सांप्रदायिक राजनीति एक निरंतर खतरा बनी हुई है। देश के नेताओं, मीडिया और नागरिकों को सामूहिक रूप से इस चुनौती का सामना करना होगा। हमें एक ऐसी राजनीति को बढ़ावा देना चाहिए जो सभी नागरिकों को साथ लेकर चले, विकास पर केंद्रित हो और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करे। तभी हम एक मजबूत, एकजुट और समृद्ध भारत का निर्माण कर पाएंगे।

FAQ

सांप्रदायिक राजनीति क्या है?

सांप्रदायिक राजनीति वह है जिसमें धार्मिक पहचान का उपयोग राजनीतिक लाभ के लिए किया जाता है। इसमें एक विशेष धार्मिक समुदाय के हितों को राष्ट्रीय हितों से ऊपर रखा जाता है और अक्सर अन्य समुदायों के खिलाफ संदेह या घृणा फैलाई जाती है, जिससे समाज में धार्मिक आधार पर ध्रुवीकरण होता है।

नेता ऐसे बयान क्यों देते हैं?

नेता अक्सर चुनावी लाभ, अपने वोट बैंक को मजबूत करने या प्रतिद्वंद्वी दलों को कमजोर करने के लिए ऐसे बयान देते हैं। उनका उद्देश्य एक विशेष समुदाय को गोलबंद करना या दूसरे समुदाय में भय पैदा करना हो सकता है, जिससे तात्कालिक राजनीतिक या चुनावी फायदे मिल सकें।

डिप्टी सीएम साव जैसे नेताओं की समाज में क्या भूमिका है?

डिप्टी सीएम साव जैसे शीर्ष पदों पर आसीन नेताओं की समाज में एक महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उनसे उम्मीद की जाती है कि वे सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा दें, सभी समुदायों के हितों की बात करें और विकासोन्मुखी राजनीति को प्राथमिकता दें। उनके बयान और कार्य समाज पर गहरा प्रभाव डालते हैं, इसलिए उन्हें एकता और समावेशिता का संदेश देना चाहिए।

सांप्रदायिक राजनीति के क्या नकारात्मक परिणाम हो सकते हैं?

सांप्रदायिक राजनीति के कई नकारात्मक परिणाम होते हैं, जिनमें सामाजिक सद्भाव का क्षरण, समुदायों के बीच अविश्वास और विभाजन, हिंसा की आशंका में वृद्धि, आर्थिक विकास में बाधा, निवेश में कमी और अंततः राष्ट्रीय एकता पर खतरा शामिल हैं। यह समाज के ताने-बाने को कमजोर करती है और वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाती है।

WhatsApp पर शेयर करें
Investment
Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Telegram Email

Related Posts

छत्तीसगढ़ महिला कांग्रेस अध्यक्ष पद: नेतृत्व परिवर्तन की सुगबुगाहट और राज्य की महिला राजनीति का भविष्य

January 5, 2026

भूपेश बघेल और छत्तीसगढ़ की राजनीतिक बयानबाजी: आरोपों के बीच नेतृत्व की अग्निपरीक्षा

January 4, 2026

चुनावी रण में बयानों की तपिश: भूपेश बघेल बयान पर छिड़ा राजनीतिक मर्यादा का संग्राम

January 2, 2026
Demo
Top Posts

Reliance Industries को अप्रैल-जून तिमाही में अब तक का biggest profit, 78% की उछाल के साथ ₹26,994 करोड़ का रिकॉर्ड मुनाफा

July 19, 202515

Disgusting comment on Dimple Yadav causes uproar: मौलाना साजिद पर FIR, बांसुरी स्वराज का 3 तीखे सवाल

July 28, 202513

PM Modi त्रिनिदाद और टोबैगो की संसद में हुए भावुक, जानें क्या कहा ऐतिहासिक संबोधन में

July 5, 202512

गणेश चतुर्थी – उत्सव भक्ति और आनंद का

August 26, 202510
Don't Miss

डिप्टी सीएम साव और सांप्रदायिक राजनीति की बहस: भारतीय लोकतंत्र के समक्ष चुनौतियाँ और समाधान

By January 12, 20260

डिप्टी सीएम साव और सांप्रदायिक राजनीति की बहस: भारतीय लोकतंत्र के समक्ष चुनौतियाँ और समाधान…

छत्तीसगढ़ महिला कांग्रेस अध्यक्ष पद: नेतृत्व परिवर्तन की सुगबुगाहट और राज्य की महिला राजनीति का भविष्य

January 5, 2026

भूपेश बघेल और छत्तीसगढ़ की राजनीतिक बयानबाजी: आरोपों के बीच नेतृत्व की अग्निपरीक्षा

January 4, 2026

चुनावी रण में बयानों की तपिश: भूपेश बघेल बयान पर छिड़ा राजनीतिक मर्यादा का संग्राम

January 2, 2026
Stay In Touch
  • Facebook
  • Twitter
  • Pinterest
  • Instagram
  • YouTube
  • Vimeo

Subscribe to Updates

Get the latest creative news from SmartMag about art & design.

Demo

Head office : 204, 2nd Floor, SS Plaza, Bhaisthan Road, Near Agrasen Chowk, Raipur, Chhattisgarh 492001 cg

Mobile : +91-9827114975

Facebook Instagram WhatsApp
Our Picks

डिप्टी सीएम साव और सांप्रदायिक राजनीति की बहस: भारतीय लोकतंत्र के समक्ष चुनौतियाँ और समाधान

January 12, 2026

छत्तीसगढ़ महिला कांग्रेस अध्यक्ष पद: नेतृत्व परिवर्तन की सुगबुगाहट और राज्य की महिला राजनीति का भविष्य

January 5, 2026

भूपेश बघेल और छत्तीसगढ़ की राजनीतिक बयानबाजी: आरोपों के बीच नेतृत्व की अग्निपरीक्षा

January 4, 2026
Most Popular

Reliance Industries को अप्रैल-जून तिमाही में अब तक का biggest profit, 78% की उछाल के साथ ₹26,994 करोड़ का रिकॉर्ड मुनाफा

July 19, 202515

Disgusting comment on Dimple Yadav causes uproar: मौलाना साजिद पर FIR, बांसुरी स्वराज का 3 तीखे सवाल

July 28, 202513

PM Modi त्रिनिदाद और टोबैगो की संसद में हुए भावुक, जानें क्या कहा ऐतिहासिक संबोधन में

July 5, 202512
© 2026 Nimble Technology. Designed by Nimble Technology.
  • Home
  • Politics
  • Buy Now

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.